ग्रेट निकोबार द्वीप में ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर रोड प्रोजेक्ट: रिपोर्ट में सभी के लिए फायदे बताए गए, लेकिन आदिवासी चिंताएं बरकरार

By akhilesh Roy

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Great Nicobar Road Project

Trunk Infrastructure Road Project

ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित Trunk Infrastructure Road Project एक महत्वपूर्ण विकास योजना है जो द्वीप के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने का काम करेगी। इस project के तहत मुख्य सड़क और सहायक सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे द्वीप के गांवों और इलाकों में पहुंच आसान हो सकेगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएगी और आर्थिक विकास को गति देगी। हालांकि, इस road निर्माण के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण जरूरी है, जो कुल 87.7902 हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित करेगा।

यह project अंडमान और निकोबार प्रशासन की बड़ी योजनाओं का हिस्सा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, एयरपोर्ट और टाउनशिप जैसे घटक शामिल हैं। कुल लागत लगभग 81,800 करोड़ रुपये आंकी गई है। पर्यावरण मंत्रालय ने इसकी मंजूरी देते हुए कहा है कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए mitigation measures अपनाए गए हैं। द्वीप सुंदरलैंड बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट का हिस्सा है, इसलिए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।

सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट की मुख्य बातें

रांची स्थित एटलस मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा तैयार की गई Social Impact Assessment रिपोर्ट में कहा गया है कि यह project सभी हितधारकों के लिए फायदेमंद साबित होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क बनने से होने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ इतने अधिक होंगे कि किसी भी संभावित नुकसान की भरपाई आसानी से हो जाएगी। इसमें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, जहां युवाओं की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। रिपोर्ट में सार्वजनिक सुनवाई का जिक्र है, जहां भूमि मालिकों को 21 दिन पहले सूचना दी गई थी।

Great Nicobar Road Project
Great Nicobar Road Project

रिपोर्ट में आदिवासी समुदायों की राय को भी शामिल किया गया है, जिसमें निकोबारी और शोम्पेन जनजातियों के विचारों का उल्लेख है। ये समुदाय तटीय इलाकों में रहना पसंद करते हैं और मौजूदा सड़क नेटवर्क का उपयोग करते हैं। रिपोर्ट दावा करती है कि project उनके जीवनशैली पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगा और वे विकास कार्यों के पक्ष में हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट में अंतिम सड़क संरेखण का विवरण नहीं है, जो मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।

आदिवासी समुदाय की चिंताएं

ट्राइबल काउंसिल ने project को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं, खासकर आदिवासी क्षेत्रों पर इसके प्रभाव को लेकर। उन्होंने रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शोम्पेन और निकोबारी समुदायों के साथ व्यापक चर्चा नहीं हुई, जो गलत है। काउंसिल के अनुसार, केवल कुछ गांवों के लोगों से बात की गई, जबकि पश्चिमी तट के निवासी जैसे पुलो बहा और पुलो भाबी के लोग इससे अछूते रहे। वे बुनियादी infrastructure जैसे मौजूदा सड़कों की मरम्मत का समर्थन करते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर वन कटाई और आदिवासी क्षेत्रों के विनाश का विरोध करते हैं।

रिपोर्ट में आदिवासी समुदायों को विकास से वंचित न करने की बात कही गई है, लेकिन ट्राइबल काउंसिल का कहना है कि उनकी सहमति को गलत तरीके से पेश किया गया। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि project से जैव विविधता पर असर पड़ेगा, जो सुंदरलैंड हॉटस्पॉट के लिए खतरा है। काउंसिल ने अगस्त में एक पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक जीवनशैली और जंगलों की रक्षा जरूरी है। सार्वजनिक सुनवाई में उनकी राय दर्ज नहीं की गई, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

भूमि मालिकों की शिकायतें

भूमि अधिग्रहण से प्रभावित land owners ने मुआवजे को लेकर असंतोष जताया है, खासकर पेड़ों और फसलों के लिए मिलने वाली राशि को अपर्याप्त बताया है। उदाहरण के तौर पर, लक्ष्मी नगर के निवासी अजैब सिंह ने कहा कि वे पंजाब से यहां बसने आए थे और अब सरकार उनकी जमीन लेना चाहती है। वे मांग कर रहे हैं कि अधिग्रहीत भूमि के बदले नई जमीन दी जाए, क्योंकि फलदार पेड़ उगाने में सात साल लगते हैं और इसमें काफी investment और मेहनत लगती है। रिपोर्ट में इन चिंताओं को कम करके आंका गया है, जो स्थानीय लोगों की नाराजगी बढ़ा रही है।

कई settlers को यह भी नहीं पता कि उनकी कितनी जमीन ली जाएगी, और सर्कल रेट्स को लेकर असंतोष है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिग्रहण राइट टू फेयर कंपेंसेशन एक्ट के तहत किया जा रहा है, लेकिन पारदर्शिता की कमी से लोग परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मूल्यांकन की जल्दबाजी ठीक नहीं है, क्योंकि सड़क का अंतिम डिजाइन अभी तय नहीं हुआ। इससे प्रभावित लोगों को उचित जानकारी और मुआवजा मिलना सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि विकास सबके लिए समावेशी बने।

परियोजना के संभावित लाभ

रिपोर्ट के अनुसार, Trunk Infrastructure Road बनने से द्वीप पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रवासन रुकेगा, जो युवाओं की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करेगा। यह सड़क असंबद्ध इलाकों को जोड़ेगी, जिससे व्यापार और कारोबार में वृद्धि होगी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि राष्ट्रीय और रक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए mitigation measures अपनाए गए हैं। कुल मिलाकर, यह project आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ेगा।

हालांकि, लाभों के साथ चुनौतियां भी हैं, लेकिन रिपोर्ट दावा करती है कि नुकसान नगण्य होंगे। द्वीप की अर्थव्यवस्था को नया रूप देने से पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में वृद्धि संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ठीक से क्रियान्वित किया जाए, तो यह project समावेशी विकास का मॉडल बन सकता है। लेकिन आदिवासी और पर्यावरणीय संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जो लंबे समय में फायदेमंद साबित होगा।

निष्कर्ष

ग्रेट निकोबार द्वीप का Trunk Infrastructure Road Project विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसमें आदिवासी चिंताओं और भूमि मालिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। रिपोर्ट भले ही सभी के लिए लाभ बताती हो, लेकिन पारदर्शिता और समावेशिता की कमी से विवाद बढ़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों का संतुलन बनाए रखना इस project की सफलता की कुंजी होगा।

यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि विकास किस कीमत पर होना चाहिए? क्या राष्ट्रीय हितों के नाम पर आदिवासी संस्कृति और जैव विविधता को जोखिम में डाला जा सकता है? पाठकों को इस पर विचार करना चाहिए कि सतत विकास के लिए mitigation measures कितने प्रभावी साबित होंगे, ताकि द्वीप का भविष्य सुरक्षित रहे।

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akhilesh Roy

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